Deep Ecology
écologie profonde / Soi écologique (deep ecology, ecological self)
नॉर्वेजियन अर्ने नेस द्वारा 1973 में नामित दार्शनिक आंदोलन और दृष्टिकोण, जिसे "उथली" पारिस्थितिकी (*shallow*) के विपरीत रखा गया है। उथली पारिस्थितिकी प्रदूषण और संसाधनों के क्षरण से लड़ती है, लेकिन अमीर देशों के मनुष्यों के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए—जहाँ प्रकृति महज एक *स्टॉक* बनी रहती है जिसे हमारे आराम के लिए प्रबंधित किया जाता है। जबकि *गहन पारिस्थितिकी* (*écologie profonde*) "पर्यावरण में मनुष्य" की उस छवि को ही चुनौती देती है, जहाँ जीव केवल संबंधों के एक समग्र क्षेत्र में *नोड्स* होते हैं। इसकी आंतरिक प्रेरणा है "*स्व की प्राप्ति*" (*Self-realisation*)—संकीर्ण *मैं* (ईगो) का विस्तार, जो एक ऐसे *स्व* में बदल जाता है जो अपने से कहीं बड़े जीवन-क्षेत्र के साथ एकाकार हो जाता है। "*गहन पारिस्थितिकी*" और "*पारिस्थितिक स्व*" इसके सामान्य फ्रेंच अनुवाद हैं।
The Shallow Ecology movement: Fight against pollution and resource depletion. Central objective: the health and affluence of people in the developed countries.
यहाँ अनुवाद प्रस्तुत है:
शब्द डीप इकोलॉजी (deep ecology) की शुरुआत अर्ने नेस ने 1973 में एक कार्यक्रमात्मक शीर्षक वाले लेख — The shallow and the deep, long-range ecology movement — के ज़रिए की, जिसे वे बाद में इसी पुस्तक में दोहराते हैं। पूरा विचार दो गहराइयों के विरोध पर टिका है। « The Shallow Ecology movement: Fight against pollution and resource depletion. Central objective: the health and affluence of people in the developed countries. » सतही पारिस्थितिकी प्रदूषण और संसाधनों के क्षरण से लड़ती है, पर उसका लक्ष्य विकसित देशों के मनुष्यों का स्वास्थ्य और समृद्धि ही बना रहता है। इसमें प्रकृति महज़ एक ऐसा परिवेश है जिसे हमारे लिए प्रबंधित किया जाना है। « Écologie profonde » (गहन पारिस्थितिकी) महज़ deep ecology का फ्रेंच अनुवाद भर है।
नेस जिसे गहरा कहते हैं, वह है « मनुष्य-अपने-परिवेश-में » की छवि को नकारकर एक relational, total-field image को अपनाना: जीव केवल किसी पृष्ठभूमि के सामने खड़े नहीं होते, वे संबंधों के एक क्षेत्र में गाँठें हैं। इस बदलाव की धुरी का एक नाम है — सेल्फ-रियलाइज़ेशन (Self-realisation), जिसे «आत्म-साक्षात्कार» कहा जाता है। नेस सेल्फ (Self) को बड़े अक्षर से लिखते हैं ताकि उसे अहं (ego) से अलग किया जा सके: « we need not cultivate the ego (…) in order to realise our potentialities. (…) The sources of joy go deeper and farther. » आत्म-साक्षात्कार का अर्थ अपने उस छोटे से स्व में सिमटना नहीं है जो «जीतना» चाहता है; बल्कि बच्चे के संकीर्ण स्व को इतना विस्तारित करना है कि उसमें दूसरे प्राणी और जीवन-रूप शामिल हो जाएँ। « पारिस्थितिकीय सेल्फ » (Soi écologique) यही विस्तारित स्व है, जो अपने से कहीं बड़े क्षेत्र से एकात्म हो जाता है।
इसे सतही पारिस्थितिकी (shallow) से अलग करना ज़रूरी है: इसलिए नहीं कि वह गलत है, बल्कि इसलिए कि वह मानव-केंद्रित बनी रहती है — वह ग्रह की देखभाल एक भंडार की तरह करती है, ताकि संपन्न मनुष्यों का हित साधा जा सके। गहन पारिस्थितिकी केंद्र को विस्थापित करती है।
इसे पारिस्थितिकीय सेल्फ और अहं से भी अलग समझना चाहिए: विस्तारित स्व व्यक्ति को विलीन नहीं करता। नेस इस पर ज़ोर देते हैं — « do not think the individual self or ego is dissolved in the larger Self »। प्राणियों की विविधता बनी रहती है; जो बदलता है, वह है वह दायरा जिससे स्व अपने को जुड़ा पाता है। तब परोपकार अनावश्यक हो जाता है: अगर हम सचमुच अपने स्व को इतना विस्तारित कर लें कि उसमें दूसरे जीव शामिल हो जाएँ, तो उनका कल्याण हमारे अपने हित का हिस्सा बन जाता है।