किस आसमान के नीचे तुम्हें प्रणाम करूँ
अल्ताई के एक छात्रावास में बच्चों को एक आदर्श पत्र लिखवाया जाता है। वह नैतिक जगत को नीले आकाश और धूसर धरती के बीच बाँटता है : ऊपर वे जिन्हें प्रणाम किया जाता है, नीचे वे जिनके प्रति कर्तव्य है।
एक प्रशासनिक प्रतिनिधि छात्रावास में आती है और कागज़ बाँटती है : क्या बच्चे अपने माता-पिता को, अपने दूर रह गए भाइयों-बहनों को पत्र लिखना चाहेंगे ? किसी ने कभी पत्र नहीं लिखा। कुछ बैठते हैं, फिर हार मान लेते हैं—क्या लिखें, यह नहीं सूझता। उन्होंने सुना है कि सैनिकों के पत्र हमेशा छंदों में होते हैं, और सोचते हैं कि क्या उनके पत्र भी वैसे ही होने चाहिए। एक छोटी लड़की की मदद के लिए प्रतिनिधि उसे कुछ पंक्तियाँ सुनाती है—एक नमूना, “जिससे हम सबको भी शिक्षा मिले”, जैसा कि कथावाचक कहता है। यह दृश्य तुवा लेखक गल्सान चिनाग ने सुनाया है, अपने बचपन के खानाबदोश संसार में, ऊपरी अल्ताई की गहराइयों में।
अंग्रेज़ी Under the many-colored blue sky live an infinite number of people I revere. Whom, of all these people, do I revere as much as I revere you, my dear Father? On the many-colored gray earth walk an infinite number of people to whom I feel obliged. To whom do I feel as obliged as to you, my dear Mother?
हिन्दी हज़ारों रंगों वाले नीले आकाश के नीचे अनगिनत प्राणी रहते हैं जिन्हें मैं प्रणाम करता हूँ। इन सबमें से किसे मैं उतना ही प्रणाम करूँ जितना तुम्हें, मेरे प्रिय पिता ? हज़ारों रंगों वाली धूसर धरती पर अनगिनत प्राणी चलते हैं जिनके प्रति मैं कर्तव्यबद्ध हूँ। तुमसे बढ़कर किसके प्रति मैं कर्तव्यबद्ध हूँ, मेरी प्यारी माँ ?
यह महज़ एक बच्चे का पत्र है, जल्दबाज़ी में लिखवाया गया। पर देखिए, यह पहले स्थान निर्धारित करती है, स्नेह के एक शब्द से पहले। यह “मैं ठीक हूँ” या “तुम मुझे याद आते हो” से नहीं खुलती : यह आकाश और धरती से खुलती है, और बाकी सब कुछ इन दोनों के बीच रख देती है। आकाश के नीचे वे जिन्हें प्रणाम किया जाता है ; धरती पर वे जिनके प्रति कर्तव्य है। दो क्रियाएँ, दो दिशाएँ—ऊपर उठी नज़र, धरती पर टिका क़दम—और हर दिशा में अनगिनत प्राणी, फिर भी चुनना है : इन सबमें से किसे, मेरे पिता ? किसके प्रति, मेरी माँ ? श्रद्धा और दायित्व अमूर्त नहीं हैं ; उनका एक ऊपर है, एक नीचे, एक दिशा, एक स्थान।
इस वाक्य का जनक स्वयं आकाश और धरती का रिश्ता है। चिनाग के यहाँ “आकाश” और “धरती” को सजावट की तरह नहीं पुकारा जाता : उन्हें “आकाश-पिता और धरती-माता” कहा जाता है। पत्र इसका सटीक परिणाम निकालता है। चूँकि आकाश एक पिता है, इसलिए अपने पिता के प्रति श्रद्धा उसके नीचे, उसकी धुरी में कही जाती है ; चूँकि धरती एक माँ है, इसलिए माँ के प्रति कर्तव्य उस पर चलकर निभाया जाता है। पत्र लिखने वाला बच्चा अंततः स्वयं को इसी ढाँचे में रखता है, और वह ऐसा हृदय के सर्वेक्षक की सटीकता से करता है : “तीन नदियों और तैंतीस पहाड़ों के पार तुम्हारी अँगूठे के नाखून जितनी छोटी बेटी” — तुम्हारी बेटी, एक अँगूठी के दाने जितनी बड़ी, तीन नदियों और तैंतीस पहाड़ों के पार। न “हमारे यहाँ”, न डाक का पता : एक ऐसा स्थान जहाँ छत है, ज़मीन है, और दूरियाँ नदियों में गिनी जाती हैं।
यह वही नीला आकाश है जिसे पुस्तक में अन्यत्र प्रार्थना की जा सकती है, आरोपित किया जा सकता है, बूढ़ा होते सुना जा सकता है यहाँ तक कि बहरा हो जाता है। यहाँ वह बोलता नहीं, चुप भी नहीं रहता : वह आश्रय देता है। वह है श्रद्धा का पहला निर्देशांक—अनगिनत सम्माननीय प्राणियों के ऊपर, वह एक ऐसा तल फैलाता है जिसके नीचे एक पिता अलग खड़ा होता है। जिसे पुकारा जाता है और जो श्रद्धा का क्रम तय करता है, वे एक ही आकाश हैं, जीवितों के रिश्ते में बँधे हुए। एक ऐसा आकाश जिसके बेटे हम हैं, और जिसके नीचे सीखते हैं कि किसके बेटे हैं।
यहाँ से हमारे अपने प्रयोग से दूरी शुरू होती है। हमारे पत्र भी यही खोजते हैं—किसे नमस्कार करें, किसका आभार मानें—पर हम सिर उठाकर शुरुआत नहीं करते। हमारे लिए आकाश किसी को वर्गीकृत नहीं करता ; वह न हमारी श्रद्धाओं के ऊपर है, न हमारे ऋणों के नीचे, वह कहीं और है, बाहर, हिसाब से परे। अल्ताई की वह छोटी लड़की अपने पिता का नाम नहीं ले सकती बिना पहले उस आकाश का नाम लिए जो उसे ढकता है, न अपनी माँ का बिना उस धरती के जिस पर वह चलती है। उसका स्नेह कहने के लिए एक संपूर्ण संसार चाहिए—और यह संसार, दृश्य से पहले, वह क्रम है जहाँ वे रहते हैं जिन्हें हम प्यार करते हैं।
बचा रहता है वह प्रश्न जो पत्र ने बिना सोचे हमें दे दिया है, हम जो एक ऐसे आकाश के नीचे लिखते हैं जो न किसी को श्रद्धा देता है, न किसी के प्रति कर्तव्य। जब हम भी खोजते हैं कि सबसे पहले किसका आभार मानें—तो किस आकाश के नीचे करते हैं ? एक ऐसा छत जो हमारे ऋणों के प्रति उदासीन है, या एक ऐसी छत जो इतनी पुरानी है, इतनी रिश्तेदार, कि किसी को श्रद्धा करना फिर भी एक ऊपर और एक नीचे रखता है ?
उद्धृत स्रोत
- Galsan Tschinag, The Gray Earth (Die graue Erde), सं. Milkweed Editions, 2010 (orig. allemand, Insel Verlag, 1999), अनु. Katharina Rout (anglais) ; rendu français maison.