पुहपोवी
वनस्पतिशास्त्री और पोटावाटोमी रॉबिन वॉल किमरर तीन अक्षरों में वह कह देती हैं जो विज्ञान कहने में असमर्थ है।
प्रात को जहाँ कुछ नहीं था, वहाँ सुबह एक मशरूम खड़ा मिलता है। क्रीम जैसा सफ़ेद, चीड़ की सूइयों के बीच से उगा हुआ, रात और मिट्टी से गुज़रकर दिन में आए हुए की नमी अभी तक उस पर टिकी हुई। रॉबिन वॉल किमरर — जीवविज्ञानी और पोटावाटोमी राष्ट्र की सदस्य — एक शब्द जानती हैं उस शक्ति का जिसने रात भर उसे बाहर धकेला। अंग्रेज़ी, उनकी वैज्ञानिक भाषा, उसके लिए कोई शब्द नहीं रखती।
पुहपोवी, वह समझाती हैं, का अर्थ है “वह शक्ति जिससे मशरूम रात के दौरान धरती से बाहर निकलते हैं”।
उन्हें यह शब्द कीवेडिनोक्वे से मिला, अनिशिनाबे जाति की नृजातीय वनस्पतिशास्त्री, एक ग्रंथ में जो परंपरागत मशरूम उपयोगों पर था। जीवविज्ञानी के लिए यह आघात कम नहीं था : अपने तकनीकी शब्दावली की भरमार के बावजूद, उनकी विज्ञान के पास इसका कोई पद नहीं है। वह स्फीति दाब, कवक तंतुओं की लंबाई का वर्णन कर सकती है, पर वह उठती हुई शक्ति नहीं। जहाँ अंग्रेज़ी एक प्रक्रिया देखती है, वहाँ पोटावाटोमी एक सामर्थ्य का नाम रखता है।
यह कमी, किमरर विज्ञान की पिछड़ाई नहीं मानतीं, बल्कि उसकी व्याकरण को जिम्मेदार ठहराती हैं। प्रयोगशालाओं की अंग्रेज़ी, वे कहती हैं, एक “वस्तुओं की भाषा” है : वह दुनिया को चीज़ों के ढेर में रख देती है। पोटावाटोमी, इसके विपरीत, जीवंत के एक बड़े हिस्से को वैसे ही संयोजित करता है जैसे एक कर्ता को — एक बेर, एक पर्वत, पानी हो सकते हैं जिस तरह एक व्यक्ति होता है। इसे वे जीवंत का व्याकरण कहती हैं।
इस शब्द के रचयिता दुनिया को एक जीवंत समग्र के रूप में समझते हैं, जो अदृश्य ऊर्जाओं से भरा और अनुप्राणित है, जो जीवन का संचार करती हैं।
यहाँ इस बात को महज़ काव्य या “आत्मवादी” विश्वास मानकर संग्रहालय की अलमारी में रख देने का प्रलोभन रोकना होगा। किमरर का दावा अधिक कठोर और अधिक क्रांतिकारी है : वह व्याकरणिक है। पुहपोवी मशरूम के अवलोकन को सजाता नहीं, वह उसके दर्जे का निर्धारण करता है — कर्ता जो क्रिया करता है, वस्तु नहीं जिसका माप लिया जाता है। प्रश्न जो वह हमारे सामने छोड़ जाता है, वह यह नहीं कि “क्या हमें इस पर विश्वास करना चाहिए?” बल्कि यह है : हम दुनिया को कैसा देखते अगर हमारी भाषाएँ भी जीवंत को किसी के रूप में संयोजित करतीं, किसी चीज़ के रूप में नहीं?
उद्धृत स्रोत
- Robin Wall Kimmerer, Tresser les herbes sacrées, सं. Le lotus et l'éléphant, 2021, अनु. Véronique Minder.