द्विचिंतन

एक शब्द जो स्वयं को ही निगल जाता है : *द्विचिंतन* एक साथ दो विरोधाभासी विश्वासों को धारण करने और दोनों को स्वीकार करने का कार्य है। यह अज्ञान नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से वास्तविकता का सचेतन हेरफेर है। आगे आने वाला मानचित्र उन भाषाओं को उजागर करता है जहाँ यही क्रिया—अर्थ को उलटकर सत्य को छिपाना—उसी वस्तु पर लागू होती है : विचार पर नियंत्रण।

द्विचिंतन
केरुबिनो अल्बेर्ती (ज़कारिया मत्तिया) — सत्य और न्याय का रूपक; केंद्र में एक नग्न स्त्री बादल पर बैठी तराजू थामे, ऊपर एक पुट्टो, नीचे दाईं ओर मेडिसी कुलचिह्न (१६२८)। मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, CC0.

द्विचिंतन : यह शब्द अपनी ही विरोधाभासी प्रकृति में एक जबड़े की तरह बंद हो जाता है। ऑरवेल की अंग्रेज़ी में जन्मा यह शब्द दोहरे चिंतन से कम, एक भ्रष्ट चिंतन को दर्शाता है, जहाँ भाषा स्वेच्छा से परायणता का औज़ार बन जाती है। यह भूल नहीं, बल्कि भूल को जानबूझकर अपनाना है—एक जीवंत विरोधाभास, जहाँ व्यक्ति एक साथ जानता और नकारता है। यहाँ बनने वाला मानचित्र समकक्षों की तुलना नहीं करता, बल्कि उसी क्रिया का पीछा करता है : अर्थ को उलटकर सत्य को शब्दों के नीचे दबा देना।

शब्द के नीचे छिपा अर्थ

द्विचिंतन दो स्पष्ट मूलों में विभाजित होता है : double लैटिन duplus (« दो बार ») से, और think पुरानी अंग्रेज़ी þencan (« सोचना, गढ़ना ») से। मूलतः यह शब्द संज्ञानात्मक द्वैत को दर्शाता है—एक विभाजित, पर जानबूझकर बँटा हुआ चिंतन। ऑरवेल ने इसे तोड़कर एक निर्दोष नवशब्द नहीं गढ़ा : उन्होंने एक उद्घाटक उपकरण बनाया, एक ऐसा शब्द जो अपने ही दफन होने की प्रक्रिया को प्रकट करता है। double- उपसर्ग अब केवल दोहराव नहीं, बल्कि उलटाव दर्शाता है : दो बार सोचना, उल्टा सोचना है।

अर्थ-परिवर्तन की वंशावली

नाइन्टीन एटी-फोर में द्विचिंतन शैलीगत अलंकार नहीं, एक राजनीतिक तकनीक है। यह शब्द टूटे हुए दर्पण की तरह काम करता है : यह वास्तविकता को प्रतिबिंबित करता है और साथ ही उसे नकारता है, और अपने प्रयोगकर्ता से इस नकार को स्वीकार करने की माँग करता है। ऑरवेल की यह उक्ति इसकी सबसे निर्मम व्याख्या है :

Even in using the word doublethink it is necessary to exercise doublethink.

जॉर्ज ऑरवेल, Nineteen Eighty-Four (The Principles of Newspeak) , पुस्तक The Principles of Newspeak  — सं. फ्रेंच अनुवाद के आधार पर, पेंगुइन, trad. viasophia

यहाँ क्रिया दोहरी है : पहले, द्विचिंतन हेरफेर को नाम देता है; फिर, इसका प्रयोग ही उस हेरफेर को साकार करता है। यह शब्द बाहरी घटना का वर्णन नहीं करता—वह उसे अनुष्ठित करता है। छिपाई गई वस्तु केवल सत्य नहीं, बल्कि सत्य की चेतना है : व्यक्ति जानता है कि वह झूठ बोल रहा है, फिर भी झूठ पर विश्वास करता है। यह भूल नहीं, भूल की भूल है—एक स्मृति जो स्वयं को ही खा जाती है। यह तोड़-मरोड़ पूर्ण है : शब्द, अपने आप को पलटकर, अपना ही जल्लाद बन जाता है।

एक ही आवरण, भाषा-दर-भाषा

यद्यपि द्विचिंतन ऑरवेल का एकमात्र शब्द है, परंतु जिस क्रिया को वह व्यक्त करता है, वह भाषाओं को पार करती है। जहाँ कहीं भाषा सत्य को प्रकट करने के बजाय छिपाने का काम करती है, वहाँ अर्थ का यही उलटाव मिलता है—न कि अनुवाद के रूप में, बल्कि संरचनात्मक प्रतिध्वनि के रूप में। आगे दिया गया मानचित्र इन अंतर्संबंधों को दर्शाता है :

Langue Forme du mot Attestation
फ़्रेंच नवभाषा ●
अंग्रेज़ी doublethink ●
स्पैनिश doblepensar ○
इतालवी bispensiero ○
रूसी двойное мышление dvoynoye myshleniye ○
तुर्की çifte düşünme ○
चीनी 双重思想 shuāngchóng sīxiǎng ○

समान प्रकृति (अर्थ का उलटाव) और समान वस्तु (वास्तविकता का सचेतन हेरफेर) फ़्रेंच और अंग्रेज़ी में प्रमाणित। स्पैनिश, इतालवी, रूसी, तुर्की, चीनी में इस सटीक विचलन का परीक्षण अभावित।

attesté par un dévoileur natif · lacune (non encore sourcé) — jamais « absent »

फ़्रेंच में नवभाषा (नई भाषा का संक्षिप्त रूप) भी वही तोड़-मरोड़ करता है। द्विचिंतन की तरह, यह केवल शब्दावली सुधार नहीं, बल्कि उल्टा सोचने की मशीन है। मूल स्रोत इसकी पुष्टि करता है :

आधुनिकता के मामले में अर्थ का धुंधलापन एक अलग प्रक्रिया से आता है : नवभाषा शब्द की अस्पष्टता का लाभ उठाकर उसे दो बिल्कुल विपरीत दिशाओं में प्रयोग करती है।

एरिक हज़ान, LQR. La propagande du quotidien , पुस्तक LQR. La propagande du quotidien  — सं. फ्रेंच संस्करण के आधार पर, रेज़ों द’आगिर, २००६, trad. viasophia

यहाँ भी वही विचलन है : भाषा अब संवाद का साधन नहीं, परायणता का। नवभाषा शब्द परिवर्तन का वर्णन नहीं करता—वह आज्ञापालन को साकार करता है। द्विचिंतन की तरह, यह अपने वक्ताओं से माँग करता है कि वे एक ऐसी वास्तविकता को स्वीकार करें जिसे वे झूठ जानते हैं, और यह भूल जाएँ कि उन्होंने भूल किया है। छिपाई गई वस्तु वही है : सचेतन हेरफेर, जहाँ भाषा दीवारों के बिना कारागार बन जाती है।

वह शब्द जो स्वयं को खा जाता है

जब कोई शब्द अपने ही जाल को नाम देता है, तो बचता क्या है? द्विचिंतन कोई अवधारणा नहीं, एक अनुभव है : दो विरोधी सत्य को एक ही हाथ में थामे रखना, और दोनों को सत्य मानना। भाषाओं का यह मानचित्र बताता है कि यह क्रिया कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक निरंतरता है—वास्तविकता को तब तक मोड़ना जब तक वह टूट न जाए। पाठक पुस्तक बंद करते हुए सोचता है : आज उसने कितनी बार अनजाने में द्विचिंतन का अभ्यास किया होगा?

उद्धृत स्रोत

  • George Orwell, Nineteen Eighty-Four (The Principles of Newspeak), सं. Penguin.
  • Éric Hazan, LQR. La propagande du quotidien, सं. Raisons d'agir, 2006.