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title: "हम-दो"
sousTitre: "अपालेच कबीले के टायसन युंकरपोर्टा एक ऐसे सर्वनाम में लिखते हैं, जिसे फ्रेंच भाषा नहीं जानती — *न्गल*, दोहरी प्रथम पुरुष। इसमें अकेले कभी नहीं सोचा जाता — जानना एक संबंध का कार्य है।"
description: "न्गल*, टायसन युंकरपोर्टा की पुस्तक *सैंड टॉक* में प्रयुक्त 'हम-दो' सर्वनाम — अपालेच दृष्टि से उस विचार के विरुद्ध जो ज्ञान को एकाकी मस्तिष्क में समेटे रखता है।"
date: 2026-06-12
lang: hi
tradition: apalech
auteurs: ["टायसन युंकरपोर्टा"]
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# हम-दो

हम-दो डार्विन से लगभग पचास किलोमीटर दक्षिण में डेरा डाले हुए हैं, यूँ शुरू होता है टायसन युंकरपोर्टा की पुस्तक *सैंड टॉक* का एक अध्याय। बूढ़ा जुमा उनका मज़ाक उड़ाता है क्योंकि उसे पता है कि दोनों आदमी मेंढकों से डरते हैं; वे हँसते हैं और आग के करीब सरक आते हैं। पाठक तुरंत ठोकर खाता है — न दृश्य पर, बल्कि सर्वनाम पर। *हम-दो* : न "मैं", न "हम"। हाथ अनजाने में गलती ढूँढ़ने लगता है — और यह गलती है भी, हमारी भाषा में। सिवाय इसके कि यह गलती नहीं है। यह एक विचार है।

> मैं तथ्य प्रस्तुत करने के बजाय सोच को उकसाने के लिए लिखता हूँ, एक तरह की तार्किक और चिंतनशील संवाद प्रक्रिया के रूप में पाठक के लिए। इसके लिए मैं अक्सर दोहरी प्रथम पुरुष का प्रयोग करता हूँ : यह सर्वनाम आदिवासी भाषाओं में आम है, मगर अंग्रेज़ी में नहीं मिलता; इसलिए मैं इसे "हम-दो" के रूप में अनुवादित करता हूँ — और मेरी उँगलियाँ इन शब्दों को टाइप कर रही हैं जबकि मेरा मुँह *न्गल* बोल रहा है।
>
> — **undefined**, *Sand Talk*, livre Sand Talk. éd. फ्रेंच अनुवाद के अनुसार (अनुवादक: ऐन डेल्मा), वेगा प्रकाशन, २०२१.

उनकी भाषा का शब्द है *न्गल*। यह प्रथम पुरुष का सर्वनाम है, मगर दो के लिए : न अकेले "मैं", न भीड़ का अनिश्चित "हम"। युंकरपोर्टा कहते हैं कि उनकी भाषाओं में अंग्रेज़ी से ज़्यादा सर्वनाम हैं — अंग्रेज़ी में तो बस *I/me* और *we/us* हैं। *« कुछ सर्वनाम ऐसे हैं जिनका अनुवाद किया जा सकता है : "मैं-खुद", "हम-दो", "हम पर दूसरे नहीं" (दूसरे नहीं), "हम सब मिलकर..."।»* जहाँ फ्रेंच को एक और अनेक के बीच चुनना पड़ता है, वहाँ विक-मुंगकन में **संबंध में दो** के लिए सटीक रूप मौजूद है : तुम और मैं मिलकर यह काम कर रहे हैं, इसी क्षण, और कोई नहीं।

यह सर्वनाम महज़ व्याकरण की जिज्ञासा नहीं है। यह जानने का एक ढंग है। *« आदिवासी विश्वदृष्टि में, किसी भी चीज़ का अस्तित्व संबंध के बाहर नहीं होता। कोई भी तत्व अलग-थलग नहीं होता : हर चीज़ को दूसरे तत्वों और संदर्भ के साथ संबंध में देखा जाना चाहिए।»* ज्ञान इस नियम से अछूता नहीं रहता। वह कोई वस्तु नहीं है जिसे हम थामे रखते हैं; वह जीवित रहता है प्राणियों, स्थानों और उनके संरक्षकों के बीच आवागमन में। *« एक प्रेक्षक वस्तुनिष्ठ होने की कोशिश नहीं करता, बल्कि वह स्वयं एक संवेदनशील तंत्र का हिस्सा बन जाता है जो स्वयं को देख रहा होता है।»* जानने के लिए पीछे नहीं हटते : प्रवेश करते हैं।

*[Une langue, sa propre bouche]* *न्गल* विक-मुंगकन भाषा का शब्द है, और युंकरपोर्टा स्वयं उसका अर्थ स्पष्ट करते हैं — *«मेरा मुँह *न्गल* बोल रहा है»* : इसके वर्तनी और अर्थ पर एकमात्र अधिकार लेखक का है। *सैंड टॉक* यहाँ उसके फ्रेंच संस्करण (वेगा, २०२१, अनुवाद: ऐन डेल्मा) में पढ़ा जा रहा है; "हम-दो" एक अंग्रेज़ी पुस्तक का फ्रेंच अनुवाद है, जिसके भीतर केप यॉर्क का एक सर्वनाम छिपा है। विचार भीतर से आता है, बिना किसी मध्यस्थ के।

जुड़ने से पहले काटना पड़ता है। हमारी सोच की प्रथम पुरुष एकाकी है : *मैं सोचता हूँ*। देकार्त के बाद से जानने वाला विषय पीछे हटता है, अकेले संदेह करता है, और अपनी निश्चितता एक ही सिर में स्थापित करता है; जानना एक निजी मामला बन जाता है, पीछे हटने की गारंटी के साथ। हमारे लिए वस्तुनिष्ठ होना मतलब है पीछे हटना, चित्र से बाहर निकलना। *न्गल* इसके विपरीत चलता है। इसमें देखने के लिए पीछे नहीं हटते : हम पहले से ही उस तंत्र का हिस्सा होते हैं जो स्वयं को देख रहा होता है। और ज्ञान यहाँ संचित नहीं होता — युंकरपोर्टा इसके विपरीत कहते हैं *« यह ज़रूरी है कि आप ज्ञान को [...] जितने संभव हो सके एजेंटों तक पहुँचाएँ, बजाय इसके कि उसे व्यक्तिगत रूप से जमा करने की कोशिश करें»*। एक ओर वह संपत्ति है जिसे हम अपने पास रखते हैं, दूसरी ओर वह धरोहर है जिसे हम प्रसारित करते हैं; एक ओर वह "मैं" है जो अलग होता है, दूसरी ओर वह जोड़ा है जो, हर "मैं" से पहले, पहले से ही सोचने की इकाई होता है।

यह नहीं कि हमें साथ सोचना नहीं आता। हमारा दर्शन संवाद के रूप में जन्मा था, एक चौक पर दो आवाज़ें। मगर हमारे यहाँ संवाद दो अलग *मैं* को मंचित करता है जो अपने तर्कों का आदान-प्रदान करते हैं; *न्गल* स्वयं उस जोड़े को सोच का स्थान बताता है। युंकरपोर्टा अपनी पुस्तक की संरचना में इसका अनुभव कराते हैं : वे लिखते हैं *«आओ हम-दो कल्पना में एक प्रयोग करें»*, और पाठक को सर्वनाम में खींच लेते हैं। पृष्ठ अब संप्रेषण नहीं रह जाता — एक जानने वाला दूसरे को ज्ञान देता हुआ — बल्कि एक संबंध बन जाता है। समानता वहीं है, संकरी और वास्तविक : एक विचार तभी जीवित होता है जब वह दो के बीच से गुज़रता है। मगर यह द्वार है, कमरा नहीं : "हम-दो" उस दहलीज़ को वह महत्त्व देता है जो हमारे संवाद में आदान-प्रदान का होता है।

*[Apalech ≠ ngarinyin]* टायसन युंकरपोर्टा केप यॉर्क प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित अपालेच कबीले से हैं; डेविड मावलजर्लाई, जिनका [*योरो योरो*](https://viasophia.org/lexique/yorro-yorro/) हमने पढ़ा, किम्बर्ली के न्गारिन्यिन बुज़ुर्ग थे — दो समुदाय, दो भाषाएँ, उनके बीच एक महाद्वीप। "आदिवासी" एक औपनिवेशिक समूहवाचक है, संस्कृति नहीं। उन्हें एक आवाज़ में नहीं मिलाया जा सकता।

युंकरपोर्टा कोई कालातीत ऋषि नहीं हैं : उनके पास डॉक्टरेट है, वे शोध प्रकाशित करते हैं, अपने साले के साथ छाल के ढाल बनाते हैं, और पढ़ाने के लिए रेत में रेखाएँ खींचते हैं। *न्गल* कोई दुर्लभ शब्द नहीं है जिसे वे उखाड़ लाए हों; यह उनके बचपन का साधारण सर्वनाम है, जिसे वे उस भाषा में ले आते हैं जिसमें इसकी कमी है। और यह कमी हमारे बारे में कुछ कहती है : हमारे पास अकेले विचारक के लिए शब्द है, मगर सोचने वाले दो के लिए कोई नहीं।

बचा रहता है वह प्रश्न जो *न्गल* हमारे *मैं सोचता हूँ* से पूछता है : यह विचार जिसे मैं अपना मानता हूँ, क्या मैंने इसे अकेले सोचा — या यह मुझे किसी [साझे परिश्रम](https://viasophia.org/lexique/akinananti/) से मिला, किसी ऐसे हम-दो से जिसे मैं भूल गया?

## स्रोत

- Tyson Yunkaporta, *Sand Talk* — Éditions Véga (Guy Trédaniel), 2021 — éd. originale Text Publishing, 2019, अनु. Anne Delmas


प्रमाणिक स्रोत : https://viasophia.org/hi/reenchanter/2026-06-12-nous-deux/
